रहस्यमय है छत्तीसगढ़ के अजूबों में एक ताला की प्रतिमा..

 रहस्यमय है छत्तीसगढ़ के अजूबों में एक ताला की प्रतिमा..

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राज्य में एक प्रतिमा ऐसी भी है जो ना सिर्फ देश में बल्कि विदेशो में भी चर्चा का विषय बनते आई है। पुरातत्व विभाग को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित ताला ग्राम में मिली एक प्रतिमा आज तक पुरातत्वप्रेमियों के लिए रहस्य और शोध का विषय बनी हुई है।

हम बात कर रहे है, 8.8 फीट ऊंची एवं 9 टन वजनी बलुआ पत्थर में बनी मानव एवं जीव-जन्तुओं की आकृति वाली एक अद्भुत एवं रहस्यमय प्रतिमा की। जो कि पुरातत्व विभाग को सन 1986-88 के मध्य ग्राम ताला में भग्नावशेषों की मलमा सफाई कराये जाने पर देवरानी मंदिर के समीप मिली थी।

रोचक बात यह है, कि इस प्रतिमा का नाम भी एक पहेली बना हुआ हैं।

यूँ तो छत्तीसगढ़ में इस प्रतिमा को “रुद्रदेव” के नाम से जाना जाता है किंतु देशभर में इस प्रतिमा को लेकर कई पुरातत्वविदों ने अलग-अलग नाम दिए है। किसी ने इसे रूद्र शिव कहा, किसी ने आदि शिव, किसी ने द्वैत व्यंजना का घोतक कहा, किसी ने कला और दर्शन की संयुक्त व्यंजना का प्रतीक शिव कहा, किसी ने शिव के जीवन एवं संहार का प्रतीक माना, किसी ने शिव की विश्व रूप की प्रतिमा कहा, किसी ने भगवान परशुराम तो किसी ने लकुलिश की प्रतिमा कहा है, तो किसी ने इसे जल-जीवन का प्रतीक माना है, किन्तु अब तक इस प्रतिमा के संबंध में सर्वमान्य नामकरण नहीं हो पाया है और यह प्रतिमा एक पहेली बनी हुई है।

आखिर क्यों है यह प्रतिमा रहस्यमयी ?

प्रतिमा की शिल्पकला और आकृति ही इस रहस्य का विषय है। जिस पर विवाद बना हुआ है इस विशाल प्रतिमा में मानव के अंग, पशु, देवमुख और सिंह के मुख दिखाई देते है। इसके सिर का पगड़ी जोड़ा सर्पों से निर्मित है| प्रतिमा में हाथ एवं अंगुलियों को सर्प के भांति आकार दिया गया है। इसके अलावा प्रतिमा के ऊपरी भाग पर दोनों ओर एक-एक सर्पफण छत्र कंधो के ऊपर है| इसी तरह बायें पैर लिपटे हुए, फणयुक्त सर्प का अंकन हैं। दुसरे जीव जन्तुओ में मोर से कान एवं कुंडल, आँखों की भौहे, छिपकली से नाक, केकड़ा से मुख की ठुड्डी निर्मित है तथा भुजायें मकरमुख से निकली हैं| सात मानव अथवा देवमुख शरीर के विभिन अंगो में निर्मित हैं।

यही कारण है कि यह देश की दुर्लभ प्रतिमा बन गई हैं। और यह प्रतिमा आखिर क्या है इस पर विवाद अब भी बना हुआ है। इस प्रतिमा के अमेरिका, इंग्लैण्ड, जर्मनी आदि देशों से रिसर्च स्कालर रहस्य की जिज्ञासा में भारत आ चुके हैं।

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Shrikant Baghmare

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