नक्सली कब्जे में योद्धा : वही हुआ जिसकी थी आशंका, सोरी और टीम लौटी खाली हाथ, सरकार ने मध्यस्थ भी नहीं किए तय

 नक्सली कब्जे में योद्धा : वही हुआ जिसकी थी आशंका, सोरी और टीम लौटी खाली हाथ, सरकार ने मध्यस्थ भी नहीं किए तय

तोपचंद, रायपुर। बीजापुर नक्सली हमले के दौरान अगवा जवान राकेश्वर मनहास को छुड़ाने गई जेल बंदी रिहाई समिति की 20 सदस्यीय टीम खाली हाथ लौट आई है। बताया जा रहा है कि टीम से नक्सली नेताओं की बात भी नहीं हुई है। ऐसे में टीम ग्रामीणों के पास नक्सलियों के नाम जवान को रिहा करने की अपील छोड़ आई है।

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समिति के एक सदस्य ने तोपचंद को बताया कि हम टेकलगुडा गए थे। जहां नक्सलियों से समिति की मुलाक़ात नहीं हुई| हमने टेकलगुडा के ग्रामीणों के पास नक्सलियों के नाम अपील की है कि जवान को सुरक्षित छोड़ दिया जाए। उम्मीद है नक्सलियों का जवाब आएगा।

इधर नक्सलियों की विज्ञप्ति को आए 24 घंटे से भी ज़्यादा का वक्त हो गया है। नक्सलियों ने विज्ञप्ति में जवान को छोड़ने के लिए वार्ता करने मध्यस्थों के नाम की घोषणा करने कहा था। लेकिन सरकार ने मध्यस्थों के नाम की घोषणा नहीं की है और न ही इस मामले में सरकार की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया आयी। ऐसे में जवान को छुड़वाने का प्रयास करने वाली सोनी सोरी ने कहा है कि सरकार जवान की रिहाई को लेकर गंभीर नहीं है और न ही सरकार को जवान की जान की चिंता है| इसलिए सरकार चुपचाप बैठी है।

जवान को छोड़ने की अपील करने के लिए समिति की ओर से सोनी सोरी, सुजीत कर्मा, दया कश्यप, संजय पंथ समेत पत्रकार गए थे। उन्हें नक्सलियों की ओर से जवाब आने का इंतज़ार है। इधर, इस मामले को लेकर पुलिस की ओर से क्या प्रयास किया जा रहा है जानने की हमने कोशिश की लेकिन जिम्मेदारों ने कॉल रिसीव नहीं किया।

दूसरी ओर जवान राकेश्वर मनहास की रिहाई के लिए बुधवार को जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन हुआ। इसमें जवान राकेश्वर मनहास के परिजन भी शामिल रहे। न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने अपने ट्वीटर हैंडल पर इस बात की जानकारी दी है। एजेंसी के अनुसार जम्मू-अखनूर राजमार्ग को प्रदर्शनकारियों ने जाम कर दिया है। उनकी मांग है कि जम्मू-कश्मीर के लाल को जल्द से जल्द नक्सलियों के चंगुल से छुड़ाया जाए।

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Shrikant Baghmare

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