सारंगढ़ सीट ने दी थी पहली महिला सांसद मिनीमाता, पुण्यतिथि विशेष

 सारंगढ़ सीट ने दी थी पहली महिला सांसद मिनीमाता, पुण्यतिथि विशेष

छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद मिनीमाता की आज 48वीं पुण्यतिथि है। असम में जन्म लेने वाली मिनी माता का नाम पहले मिनाक्षी देवी था और उनकी माता का नाम देवबती था। देवबती पहले छत्तीसगढ़ में ही रहती थी। लेकिन 1897 से 1899 में आए अकाल के बाद अपने माता पिता और दो बहनों के साथ काम करने असम चली गई थी। जहां पहले रास्ते में उनकी दोनों बहनों की मृत्यु हो गई और असम पहुंचने के बाद उनके माता पिता भी चल बसें।

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मिनाक्षी देवी से मिनी माता बनने की कहानी

देवबती असम में रहने लगी जहां उन्होंने मीनाक्षी देवी को जन्म दिया। यहां मीनाक्षी ने मीडिल तक की पढ़ाई की और 1920 में स्वदेशी आंदोलन में भाग लिया। इसके कुछ समय बाद गुरु गद्दीनसीन अगमदास जी गुरु गोसाई (सतनामी पथ के) धर्म का प्रचार करने असम पहुँचे। वहाँ मिनी के परिवार में ठहरे थे। उन्होंने मिनी के माताजी के सामने मीनाक्षी से शादी का प्रस्ताव रखा। इस प्रकार मीनाक्षी देवी मिनी माता बन गईं और छत्तीसगढ़ वापस आईं।

अगमदास गुरु के देहान्त के बाद उठाई जिम्मेदारी

अगमदास गुरु के कारण ही पूरे सतनामी समाज ने राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लिया। मिनी माता इन सब के लिए माता समान थीं। वे हमेशा उन लोगों की मदद करने के लिए तैयार रहती थीं, जिनका कोई नहीं है जिन पर समाज दबाव डाल रहा है। जो कोई भी परेशानी में होता, मिनी माता के पास आ जाता। सन् 1951 में अगमदास गुरु का देहान्त हो गया और मिनी माता पर अगमदासजी गुरु की पूरी ज़िम्मेदारी आ पड़ी। घर सँभालने के साथ-साथ समाज का कार्य पूरी लगन के साथ करती रहीं। उनका बेटा विजय कुमार तब कम उम्र का था।

1952 में मिनी माता बनी सांसद

मिनी माता 1952 में स्वतंत्र भारत मे अविभाजित मध्यप्रदेश में सारंगढ़ के उपचुनाव जीत कर प्रथम महिला सांसद हुई। वर्ष 1952 से 1972 तक लोकसभा में सारंगढ़, जांजगीर तथा महासमुंद क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और तीन बार सांसद रही। सांसद बनने के बाद उनकी ज़िम्मेदारी और भी बढ़ गई। ऐसा कहते हैं कि हर काम को जब तक पूरा नहीं करतीं, तब तक वे चिन्तित रहती थीं।

नारी शिक्षा के लिए किया काम

नारी शिक्षा के लिए मिनी माता खूब काम करती थीं। बहुत सारी लड़कियाँ उनके पास रहकर पढ़ाई करतीं। जिन लड़कियों में पढ़ाई के प्रति रुचि देखतीं, उनके लिए शिक्षा का बन्दोबस्त करतीं। छत्तीसगढ़ साँस्कृतिक मंडल की मिनी माता अध्यक्षा रहीं। छत्तीसगढ़ कल्याण मज़दूर संगठन जो भिलाई में है, उसकी संस्थापक अध्यक्षा रहीं। बांगो-बाँध मिनी माता के कारण ही सम्भव हुआ था।

1972 में हुई विमान हादसे में मौत

सन् 1972 में एक वायुयान भोपाल से दिल्ली की ओर जा रहा था। मिनी माता भोपाल में अपने बेटे विजय के पास आई थीं। उसी वायुयान से दिल्ली वापस जा रही थीं। उस वायुयान में चौदह यात्री थे। जो रास्तें में हादसे का शिकार हो गया और इसी हादसे में मिनी माता की मृत्यु हो गई।

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Shrikant Baghmare

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