प्रदेश में रिकवरी दर 83 फीसदी पार, क्योंकि रोज 11 हजार से ज्यादा मरीज हो रहे ठीक

 प्रदेश में रिकवरी दर 83 फीसदी पार, क्योंकि रोज 11 हजार से ज्यादा मरीज हो रहे ठीक
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तोपचंद, रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच राहत की खबर मिली है। जिस तरह से अप्रैल में कोरोना ने कहर बरपाया था, उसी तरह मई के पहले सप्ताह में इस संक्रमण से राहत मिलने लगी है। पिछले एक सप्ताह से रोज 11 हजार से ज्यादा मरीज ठीक हो रहे हैं। इससे रिकवरी दर बढ़ गई है। वहीं मार्च 2020 से अब तक होम आइसोलेशन में ठीक होने वालों की संख्या पांच लाख से ज्यादा पहुंच गई है। प्रदेश में अब तक 7,71,701 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इस बीच अस्पताल व होम आइसोलेशन मिलाकर 6,41,449 लाख मरीज रिकवर हो गए हैं। मरीजों के लगातार स्वस्थ होने के कारण प्रदेश में सप्ताहभर में रिकवरी रेट तीन फीसदी बढ़ा है और 83 फीसदी के आसपास पहुंच गया है।

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डॉक्टरों के अनुसार बिना व हल्के लक्षण वालों के लिए होम आइसोलेशन ही बढ़िया है। घर का माहौल खुशनुमा होता है, जिससे मरीजों को स्वस्थ होने में काफी मदद मिलती है। क्रॉस इंफेक्शन का भी खतरा नहीं रहता। यही कारण है कि कुछ अपवाद को छोड़कर ज्यादातर मरीज 7 से 10 दिनों में स्वस्थ हो जाते हैं। हालांकि होम आइसोलेशन में 17 दिन रहने का नियम है।

*प्रदेश में 27 फीसदी मौतें भी*
दूसरी ओर चिंता की बात यह है कि प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 9,200 पहुंच गई है। केवल रायपुर में ही कोरोना से 2,500 से ज्यादा मौतें हुई हैं। पिछले 12 दिनों में 2,742 मौत हुई हैं। कोरोना से रोजाना औसतन 228.5 मरीजों की जान जा रही है। पिछले एक माह में कोरोना के कारण सडन डेथ यानी कार्डियक अरेस्ट के कारण आधे से ज्यादा गंभीर मरीज जान गंवा चुके हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा रायपुर में 2,500 से ज्यादा मौत हुई है, जो कुल मौत की 27 फीसदी है।

लक्षण दिखें तो जांच जरूर कराएं
कोरोना कोर कमेटी के सदस्य डॉ. आरके पंडा के अनुसार ज्यादा मौत के लिए नए वेरिएंट व मरीजों की लापरवाही काफी हद तक जिम्मेदार है। मरीज लक्षण दिखते ही जांच व इलाज करवाएं तो मौतों की संख्या आधी हो सकती है। मरने वालों में 90 फीसदी मरीजों को सांस की तकलीफ होती है। यानी जब मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, तब उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही होती है। उन्हें तत्काल आक्सीजन व वेंटीलेटर की जरूरत होती है। अगर मरीज दूसरी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं तो मौत का रिस्क और बढ़ जाता है।

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Harish Jangde

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