DBT की राशि समय पर नहीं मिलने से टीबी के मरीज़ परेशान, तकनीकी ख़ामियों में उलझी निक्षय पोषण योजना

 DBT की राशि समय पर नहीं मिलने से टीबी के मरीज़ परेशान, तकनीकी ख़ामियों में उलझी निक्षय पोषण योजना

Raipur / Rajini Thakur | 62 साल के बिसाहु राम यादव (बदला हुआ नाम )बेमेतरा के रहने वाले हैं, बीते सात महिनों से उनका टीबी का इलाज चल रहा है, इलाज बेहतर मिल रहा है, लेकिन बिसाहु राम की शिकायत है कि उन्हें डायरेक्ट बेनिफीट ट्रांसफर की राशि नहीं मिल रही है. यही शिकायत रायपुर के उरला इलाके में रहने वाली 36 साल की नीलम वर्मा(बदला हुआ नाम ) की भी है. नीलम में टीबी डायग्नोज हुए चार महिने हो गए.इलाज भी शुरु हो गया ,लेकिन डीबीटी की राशि मिलनी शुरु नहीं हुई है. ये मामला महज रायपुर या बेमेतरा जिले का नहीं है बल्कि छत्तीसगढ़ के तकरीबन हर जिले में इस तरह के मामले हैं ,जहां टीबी के मरिजों का इलाज तो शुरु हो गया है.लेकिन डीबीटी की राशि मिलनी शुरु नहीं हुई है.

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क्या है डीबीटी राशि ?

केंद्र सरकार ने ट्यूबरकुलोसिस (TB) के मरीजों को हर महीने 500 रुपए मदद देने की योजना बनाई है। ताकि वे अपने लिए हेल्दी फूड (पौष्टिक आहार) खरीद पाएं और इलाज के लिए ट्रैवल में खर्च कर सकें। मरीजों को यह मदद उनके पूरी तरह ठीक होने तक दी जानी है। आधार नंबर और मेडिकल डॉक्युमेंट्स के हिसाब से रकम बैंक अकाउंट में डायरेक्ट ट्रांसफर होती है। इसलिए इसे डायरेक्ट बेनिफीट ट्रांसफर या डीबीटी भी कहा जाता है.  मरीजों को केंद्र की तरफ़ से हर महिने 500 रुपए दिए जाने का प्रावधान है . तीन साल पहले ये योजना शुरु की गई जिसका मकसद टीबी के मरीजों को बेहतर इलाज के साथ-साथ बेहतर पोषण देना भी था. लेकिन फिलहाल इस योजना का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. कोरोना संकट के बाद स्थिती और बदली है.

क्या है व्यवस्था, कहां है ख़ामी ?

मरीजों को डीबीटी की राशि मिलने में अनियमितता है, हालाकि ऐसा नहीं है कि ये राशि मरीजों को मिल ही नहीं रही है,लेकिन जो व्यवस्था है,उसके तहत राशि नहीं मिल पा रही है, नियम के तहत टीबी का इलाज शुरु होने के साथ ही मिलनी शुरु हो जानी चाहिए,और इलाज पुरा होने तक मिलनी चाहिए. लेकिन तकनीकी दिक्कतों और कागजी खानापुर्ति की वजह से ये राशि काफी देर से मिलनी शुरु होती है. कई बार तो मरीज को ये राशि इलाज पुरा के बाद एकमुश्त मिलती है. लेकिन देरी से मिलने पर इस योजना का पुरा मकसद धुंधला पड़ जाता है. इलाज के दौरान मिलने वाली राशि का उपयोग मरीज अपने पोषण और इलाज के दौरान आने वाले खर्चों में कर सकता है. लेकिन आमतौर पर राशि या तो बहुत देरी से आना शुरु होती है या इलाज के बाद एकसाथ ट्रांसफर की जाती है. जिससे मरीज को ना तो इस योजना का ना ही इस राशि का लाभ मिल पाता है.

डीबीटी की राशि मिलने में क्युं हो रही है देरी

राशि में देरी के दो बड़े कारण हैं, पहला टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग और जांच में देरी, स्क्रीनिंग देरी से होती है ऐसे  में मरीज में टीबी का पता भी देर से चलता है, और योजना का लाभ मिलना शुरु होने में समय लगता है. दुसरा कागजी कारवाइ में होने वाली देरी. स्वास्थय विभाग अलग-अलग समय पर होने वाले मरीजों की पहचान के बाद अलग-अलग नाम भेजे जाने के बदले एक मुश्त नाम भेजता है, ऐसे में पहले से टीबी की पहचान वाले मरीज को  राशि देर से मिलनी शुरु होती है. रायपुर जिले में काम कर रहे टीबी वॉलेंटियर लोकेश बताते हैं कि मरीज इस वक्त सबसे ज्यादा इसी बात की शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें डीबीटी की राशि समय पर नहीं मिल रही है.

टीबी से जुड़ी सामान्य जानकारी

टीबी (ट्यूबरकुलोसिस, यक्ष्मा, तपेदिक या क्षयरोग) एक संक्रामक रोग है, जो आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है। टीबी दुनियाभर में दूसरी सबसे बड़ी जानलेवा बीमारी है। टीबी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हवा के द्वारा फैलता है। आप हवा में सांस लेकर टीबी के बैक्टीरिया को प्राप्त कर सकते हैं और टीबी से ग्रस्त हो सकते हैं। टीबी के बैक्टीरिया हवा में उन व्यक्तियों द्वारा फैलाए जाते हैं, जिनके शरीर में पहले से ही टीबी के बैक्टीरिया हैं। यह एक धीमी-गति से बढ़ते बैक्टीरिया के कारण होता है जो शरीर के उन भागो में बढ़ता है जिनमे खून और ऑक्सीजन होता है इसलिए टीबी ज़्यादातर फेफड़ों में होता है। इसे पल्मोनरी टीबी (Pulmonary TB) कहते हैं। टीबी शरीर के अन्य भागों में भी हो सकता है। इसके लक्षणों में लगातार तीन हफ्ते से ज्यादा निरंतर कफ वाली खांसी होना, थकान और वजन घटना शामिल है। टीबी आमतौर पर उपचार के साथ ठीक हो जाते हैं, इसके उपचार में एंटीबायोटिक दवाओं के कोर्स शामिल हैं। इसका उपचार अक्सर सफल ही होता है, लेकिन इसके उपचार में 6-9 महीने लग सकते हैं और कुछ स्थितियों में 2 साल तक का समय भी लग सकता है।

कैसे होता है टीबी का इलाज

डॉक्टर एंटीबोयोटिक दवाओं के द्वारा बैक्टीरिया को मारकर टीबी का इलाज करते हैं। ये दवाएं टीबी के हर मरीज को दी जाती हैं, जिनमें शिशु, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और वे लोग जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है आदि शामिल हैं।
सामान्य दवाएं जिनमें शामिल हैं:

  • आइसोनाइजिड
  • इथैमब्यूटोल (Myambutol)
  • पिराजिनामाइड
  • रिफैम्पिन (Rifadin, Rimactane)

सक्रिय ट्यूबरकुलोसिस के लिए उपचार –

  • मल्टीड्रग-रेसिसटेंट टीबी की रोकथाम करने के लिए एक से अधिक दवाओं का इस्तेमाल करना। टीबी के लिए सामान्य उपचार को दो महीने के लिए चार प्रकार की दवाओं के रूप में शुरू किया जाता है।
  • आवश्यकता पड़ने पर उपचार को चार से नौ महीने या उससे अधिक समय तक जारी रखना। इस समय के दौरान सेंसिविटी टेस्ट के रिजल्ट के आधार पर कई दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
  • ड्रग प्रतिरोधी होने के कारण अगर उपचार काम ना कर पाए तो अलग प्रकार की दवाओं के संयोजन का उपयोग करना। ड्रग प्रतिरोधी स्थिति तब होती है, जब उपचार के बाद भी टेस्ट से पता चलता है कि टीबी बैक्टीरिया अभी भी सक्रिय हैं।
  • एचआईवी से ग्रस्त लोग, टीबी से संक्रमित जो ज्यादातर दवाओं से प्रतिरोधी हैं, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए अलग उपचार योजनाओं का प्रयोग करना।

लटेंट (Latent) टीबी के इलाज के लिए लिए –

  • सक्रिय टीबी (Active TB)  से बचने के लिए और टीबी के बैक्टीरिया को मारने के लिए एक दवाई का उपयोग करना।
  • आइसोनियाजिड (Isoniazid) एक मानक उपचार होता है, जो 9 महीनो के लिए होता है। जो व्यक्ति आइसोनाइजिड (Isoniazid) को 9 महीनो के लिए नहीं ले सकते तो कभी-कभी उनके लिए महीनों की उपचार योजना तैयार की जाती है।
  • चार महीने के लिए रिफैम्पिन का उपचार करवाना एक उपचार का एक और विकल्प हो सकता है। यह एक स्वीकार्य वैकल्पिक उपचार होता है। यह उपचार खासकर उन लोगों के लिए होता है, जो टीबी के उन बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं जो आइसोनाइजिड के प्रतिरोधी हैं।
  • बैक्टीरिया को मारने के लिए आपको 12 हफ्तों तक 2 एंटीबायोटिक्स लेना। इस उपचार में हर एंटीबायोटिक को डॉक्टर या स्वास्थ्य पेशेवर के निरिक्षण में दिया जाता है। एंटीबायोटिक की हर खुराक लेने से टीबी बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोधी होने से रोकने में मदद मिलती है। एंटीबायोटिक संयोजनों में आइसोनाइजिड और रिफैपेन्टाइन या आइसोनाइजिड और रिफैम्पिन शामिल है।
  • यदि उपचार विफल हो जाता है, अक्सर यह तब होता है जब दवाएं उचित और नियमित रूप से ना ली जाएं। यह बहुत जरूरी है कि आप दवाओं के लिए दिए गए सभी दिशानुर्देशों का पालन करें। भले ही आपको कुछ ही हफ्तों में स्वस्थ महसूस होने लगे (खासकर लोगों को होने लगता है) फिर भी आप अपनी दवाओं का पूरा कोर्स खत्म करना चाहिए। डॉक्टरों द्वारा दिए गए सभी अपॉइंटमेंट तारीख को डॉक्टर के पास उपस्थित होना बहुत जरूरी है। यह ये जांचने के लिए होता है कि टीबी उपचार के प्रति प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं और यह जांचने के लिए की कहीं उपचार से कोई साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा।
    लंबे समय का कोर्स, बैक्टीरिया को शरीर से पूरी तरह से साफ कर सकते हैं। अगर आप पूरा कोर्स नहीं करते तो नीचे दी गई समस्याएं हो सकती हैं।
  • आप अन्य व्यक्तियों में संक्रमण छोड़ सकते हैं।
  • आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते। आपको बेहतर महसूस हो सकता है, लेकिन टीबी बैक्टीरिया आपके शरीर में मौजूद रहते हैं। ये बाद के किसी समय में फिर से सक्रिय हो सकते हैं, और आपको बहुत अधिक बीमार बना सकते हैं।
  • यदि मूल संक्रमण का आंशिक रूप से ही इलाज किया गया है, तो बैक्टीरिया एंटीबायोटिक्स से प्रतिरोधी हो सकता है। ऐसी स्थिति होने पर टीबी का इलाज करना और कठिन हो जाता है।

रजनी ठाकुर ने REACH MEDIA FELLOWSHIP के लिए ये रिपोर्ट तैयार की है

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Badal Singh Thakur

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