महिला एवं बाल विकास कार्यालयों में शिकायत पेटी लगाना अनिवार्य: राज्य महिला आयोग

 महिला एवं बाल विकास कार्यालयों में शिकायत पेटी लगाना अनिवार्य: राज्य महिला आयोग

तोपचंद रायपुर। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बुधवार को शाम 4 से 6 बजे तक लोक सेवा केन्द्र, कलेक्टर परिसर रायपुर में राज्य के सभी जिलों के महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारियों, नवा विहान के जिला संरक्षण अधिकारियों एवं सखी वन स्टॉप सेंटर के केन्द्र प्रशासकों तथा कांउसलर को विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से आवश्यक निर्देष दिए गए।

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डॉ. नायक ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने, उनके हितों की देखभाल व उनका संरक्षण करने, महिलाओं के प्रति भेदभाव व्यवस्था को समाप्त करने, हर क्षेत्र में उन्हें विकास के सामान अवसर दिलाने एवं महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों, अपराधों पर त्वरित कार्यवाही करने के लिए राज्य महिला आयोग  निरंतर कार्यरत है। महिलाओं से जुड़ी संवेदनशील मामलों में संबंधित अधिकारियों को तत्परता से कार्य करने की आवश्यकता है।

उन्होंने निर्देषित किया कि जिन मामलों में कोर्ट से आदेश पारित हो गया है, उनका अनुपालन करना आवश्यक है। आदेश का अनुपालन नहीं होने पर ऐसे प्रकरणों को संबंधित स्थानीय अधिकारी प्रताड़ित महिला के माध्यम से एक आवेदन राज्य महिला आयोग को प्रेषित करें। डॉ. नायक ने आश्वासन दिया कि ऐसे अवमानना के प्रकरणों पर संबंधित जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से मिलकर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

इस कांफ्रेंस में अध्यक्ष के संज्ञान में आया कि सखी सेंटर के सलाहकारों को महिलाओं के कानूनी अधिकारों का ज्ञान नहीं है। इसकी विस्तृत जानकारी के लिए संरक्षण अधिकारी, एम.एस.डब्ल्यू, पैरालीगल सलाहकार का तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आगामी दिनों में जल्द ही रायपुर में आयोजित किया जाएगा। सभी जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देषित किया गया कि एक सप्ताह के भीतर महिला एवं बाल विकास कार्यालयों के सामने एक शिकायत पेटी लगवाएं और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि स्थानीय महिलाओं को इसकी जानकारी हो सके। इसी तरह आंतरिक परिवाद समिति एवं स्थानीय परिवाद समिति का गठन हर शासकीय एवं अर्धशासकीय संस्थाओं में करें, ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न के मामले को रोका जा सके। इस समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों का संबंधित विभाग में मोबाईल नबंर सहित डिस्प्ले करना आवश्यक है। यदि औचक निरीक्षण के दौरान किसी विभाग में यदि इसका गठन करना नहीं किया गया है तो संबंधित अधिकारी के उपर पचास हजार रूपये का अर्थदंड लगाया जाएगा।

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