वुमन्स डे : छत्तीसगढ़ का महिला प्रधान गांव, जहाँ हर घर के नेम प्लेट पर लिखा है ‘महतारी’ का नाम

 वुमन्स डे : छत्तीसगढ़ का महिला प्रधान गांव, जहाँ हर घर के नेम प्लेट पर लिखा है ‘महतारी’ का नाम
स्पेशल डेस्क, तोपचंद। आज इंटरनेशनल वुमन्स डे है याने महिलाओं का विशेष दिन जब चारो तरफ महिला सशक्तिकरण और समानता के अधिकार की लम्बी चौड़ी बात की जाती है। इन सभी के इतर जमीनी हकीकत से हम सभी वाकिफ हैं, भारत समेत दुनियाभर के देशों में महिलाओं को लेकर कुछ ख़ास सुधार नहीं हुआ बल्कि अगर हमारे समाज की बात करें तो अब ऐसे भी वारदात सामने आते हैं जब प्रशासनिक तंत्र, सरकार से लाकर समाज तक अपनी साख बचाने महिलाओं से जुड़े अपराधों को छुपाने या दबाने का प्रयास करते हैं। लेकिन, इन सभी के बावजूद कई ऐसे पॉजिटिव उदहारण भी सामने आते हैं जो वाकई महिला सशक्तिकरण की वकालत करते हैं, उदहारण पेश करते हैं।

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इस सो काल्ड जेंडर इक्वालिटी वाले समाज के बीच छत्तीसगढ़ में एक ऐसा गांव है, जहां प्रत्येक घर की प्रधान उस घर की महिला है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का एक छोटा सा गांव पतोरा जहाँ हर घर के बाहर नेम प्लेट पर महिला मुखिया का नाम है, यहां की पंचायत ने तय किया कि महिला सशक्तिकरण तभी होगा जब महिलाओं के हाथ में जिम्मेदारी होगी, महिलाएं घर में वास्तविक मुखिया की भूमिका अदा करती है लेकिन घर के सामने नाम पुरुषों का होता है।

ग्राम पतोरा ने यह चलन बदला और इस गांव के हर घर में महिला मुखिया का नाम इंगित है। इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि ग्राम पतोरा में पंचायत द्वारा अभिनव पहल की गई ताकि महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत मैसेज दिया जा सके। गांव के लोग काफी गौरवान्वित है।

गांव की सरपंच भी एक महिला है

गांव की सरपंच महिला अंजीता साहू ने बताया कि हमने यह निर्णय लिया कि गांव के हर घर में महिला मुखिया का नाम घर के सामने लिखेंगे। स्वाभाविक रूप से इस कदम से महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी। साथ ही इस महत्वपूर्ण निर्णय से अन्य गांव के लोग भी महिलाओं को सशक्तिकरण करने के प्रयासों को बढ़ावा देंगे।

वे आगे कहती हैं, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए यह अहम है कि मुखिया की जिम्मेदारी महिलाओं को दी जाए क्योंकि घर के अहम निर्णय में अंतिम रूप से मुखिया की स्वीकृति होती है। मुखिया के अनुमोदन के बाद ही घर के सारे निर्णय होते हैं स्वाभाविक रूप से पतोरा में जब यह निर्णय लिया गया है तो इसके परिणाम बहुत अच्छे होंगे और महिलाओं की शक्ति मजबूत होगी महिलाओं के हाथ मजबूत होने से स्वाभाविक रूप से परिवार भी मजबूत होगा और परिवार मजबूत होने से गांव मजबूत होगा।

गांव के मर्द भी करते हैं मर्दानियों का समर्थन

गांव के पुरुष भी इस निर्णय से काफी खुश हैं उन्होंने बताया कि स्त्री और पुरुष दोनों मिलकर ही परिवार का संचालन करते हैं और घर के अधिकतर निर्णय महिलाएं लेती हैं। घर के मुखिया के रूप में भी महिला को ही जिम्मेदारी दी जानी चाहिए इस तरह से महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने की दिशा में यह मजबूत कदम होगा।

दिल्ली ने भी की इस अभिनव पहल की तारीफ

पतोरा गांव में ग्रामीणों के इस नवाचार को देखने आज दिल्ली से टीम भी पहुंची। दिल्ली की टीम ने इस नवाचार की प्रशंसा की और गांव के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण जनों की प्रशंसा की। दिल्ली के टीम के सदस्यों ने कहा कि यह पहल बहुत ही महत्वपूर्ण है और नारी सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर होगा। दिल्ली की टीम से स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी आनंद शंकर के साथ अधिकारी पहुंचे थे। पतोरा गांव की पंचायत ने ऐसी पहल की है जो पूरे देश के लिए मिसाल बनेगी।

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Badal Singh Thakur

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