महावीर अखाड़े की 125 साल से चली आ रही परम्परा टूटी, नागपंचमी को होता है ‘दंगल’

 महावीर अखाड़े की 125 साल से चली आ रही परम्परा टूटी, नागपंचमी को होता है ‘दंगल’

Raipur/Nisha Sharma। प्रदेश के सबसे पुराने अखाड़ों में शामिल राजधानी के पुरानी बस्ती स्थित जैतू साव मठ परिसर में संचालित महावीर व्यायाम शाला में पिछले 125 वर्ष से प्रतिवर्ष नागपंचमी के दिन कुश्ती का आयोजन किया जाता था, लेकिन इस बार कोरोना के प्रकोप के चलते इसे रद्द कर दिया गया है।

Header Ad

Header Ad

इस बारे में महावीर व्यायाम शाला के उपाध्यक्ष गजेश यदु ने बताया कि इस अखाड़े के संचलनकर्ता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय महंत लक्ष्मी नारायण दास जी है। इसका 125 सालों से संचालन उनके परिवार के द्वारा किया जा रहा है और प्रति वर्ष नागपंचमी के दिन विशेष पूजा कर दंगल का आयोजन किया जाता था। जिसमें पहलवान भाग लेते थे।

कोरोना की वजह से इस बार दंगल का आयोजन रद्द

उपाध्यक्ष गजेश यदु ने बताया कि कोरोनाकाल के कारण 125 वर्ष की परम्परा इस बार टूट गई है। इस बार यहां दंगल का आयोजन नहीं किया जाएगा। इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए केवल विशेष पूजा का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें बहुत कम लोग शामिल होंगे।

यहां की मिट्टी में है कई औषधियों के गुण

गजेश यदु बताते है कि अखाड़े की मिट्टी में बहुत से गुणकारी औषधियों का भंडार है। दंगल के दौरान यदि किसी को चोट आ गई तो इस मिट्टी के जरिए ही उसका उपचार किया जाता है। मिट्टी में घी, सरसों का तेल, मठा, हल्दी और कई प्रकार की जड़ी बूटियों को मिलाया जाता है।

राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पहलवान यहां से निकले

यहां के अखाड़े से पहलवानी का हुनर सीख कई पहलवान राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपना दम दिखा चुके हैं। इस समय कोरोना वायरस के कारण अखाड़े बन्द है। लेकिन यदि यहां की पहलवानों की बात की जाए तो वर्तमान में यहां 350 लोग पहलवानी के दाव पेंच सीख रहे है। संचालन समय सुबह 5 से 10बजे और शाम को 5 बजे से 9 बजे तक होता है।

Header Ad

Nisha Sharma

Related post

Open chat
Join Us On WhatsApp