बीजापुर नक्सली हमला : जानें कैसे तीन जगह एंबुश लगाकर ली 22 जवानों की जान

 बीजापुर नक्सली हमला : जानें कैसे तीन जगह एंबुश लगाकर ली 22 जवानों की जान

तोपचंद, बीजापुर। जिले में शनिवार को जवानों पर हुए नक्सली हमले को लेकर अब स्थिति साफ हो चुकी है। नक्सलियों ने तीन जगहों पर एंबुश लगाकर जवानों को घेरा और फिर खून की होली खेली। बस्तर पुलिस के अनुसार शहीद होने वाले जवानों में बस्तर बटालियन का एक, डीआरजी के 8, कोबरा बटालियन के 7 और एसटीएफ के 6 जवान शामिल हैं। इस प्रकार कुल 22 जवान इस हमले में शहीद हुए और 31 जवान घायल हुए है।
इस हमले में बड़ी संख्या में नक्सलियों के मारे जाने की खबर है। हालांकि सुरक्षा बलों को एक महिला नक्सली का ही शव मिला है। बस्तर आईजी के अनुसार बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए है, जिन्हें उनके साथी 4 ट्रैक्टर-ट्रैली में भरकर ले गए हंै। फिलहाल नक्सलियों की ओर से इस बात की पुष्टि नहीं की गई है।

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हाइलाइट्स

  • बीजापुर तर्रेम थाना क्षेत्र में नक्सल ऑपरेशन के दौरान 22 जवान शहीद
  • नक्सलियों ने U आकार का एम्बुश लागाकर घेरा
  • हिड़मा और बड़ी संख्या में नक्सलियों के होने के लगातार मिल रहे थे इनपुट
  • बड़े मुठभेड़ की तैयारी कर जंगलों की ओर रवाना हुए थे 2000 से ज्यादा जवान
  •  4 किलो मीटर क्षेत्र में फैला था जवानों का शव
  • सीएम भुपेश बघेल पहुंचे राजधानी, चल रही बैठक, कल बस्तर का दौरा

U-आकार का एंबुश बनाकर हमला
घायल जवानों में से एक ने एक टीवी चैनल को बताया कि नक्सलियों की संख्या 600 से अधिक थी। सभी अत्याधुनिक हथियार से लैस थे। जवान के अनुसार उन्हें यू-शेप की एंबुश में फंसाकर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। जवान ने बताया कि दो पहाड़ियों के बीच नक्सलियों ने एंबुश बना रखा था। एक अन्य घायल जवान ने बताया कि नक्सलियों के पास यूबीजीएल, रॉकेट लांचर और इंसास समेत एके 47 जैसे हथियार थे। नक्सली दोनों पहाड़ियों के बीच में फंसे जवानों पर 100 से 200 मीटर की दूरी से फायर कर रहे थे।

इन 22 जवानों की हुई शहादत
नक्सली हमले में छत्तीसगढ़ मूल के 8 जवान शामिल हैं। इसमें जांजगीर चांपा के मालखरौद के रहने वाले दीपक भारद्वाज, कांकेर जिला के चारामा के रहने वाले प्रधान आरक्षक रमेश कुमार जुर्री, बीजापुर के आवापल्ली के रहने वाले प्रधान आरक्षक नारायण सोढ़ी, बीजापुर के जंगला के रहने वाले आरक्षक रमेश कोरसा, बीजापुर के बासागुडा के रहने वाले आरक्षक सुभाष नायक, बीजापुर शहर के रहने वाले सहायक आरक्षक किशोर एंड्रिक, और बीजापुर के मिरतुर के रहने वाले सहायक आरक्षक बोसा राम करटामी और बीजापुर के मिरतुर के रहने वाले सहायक आरक्षक सनकू राम सोढ़ी शामिल हैं।


करीब दो हजार जवान निकले थे ऑपरेशन पर
बस्तर पुलिस के अनुसार शुक्रवार रात बीजापुर और सुकमा के डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड), एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स), सीआरपीएफ (सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स) और कोबरा के संयुक्त बल नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले दक्षिण बस्तर के इलाके में संयुक्त अभियान को निकले थे। सूचना मिली थी कि यहां नक्सयियों का जमावड़ा है। अभियान में बीजापुर के प्रेम से 760, उसूर से 200 तथा पामेड़ से 195 एवं सुकमा के मिनपा से 483 और नरसापुरम से 420 का बल रवाना हुआ था। यानी करीब दो हजार से ज्यादा जवान ऑपरेशन में शामिल थे।
शनिवार की दोपहर करीब 12 बजे सुकमा-बीजापुर की सीमा पर सुकमा जिले के जगरगुंड़ा थाना क्षेत्र के जोनागुड़ा गांव के समीप, बीजापुर के जीरागांव और टेकलगुडा में नक्सलियों की पीएलजीए बटालियन और तर्रेम के सुरक्षा बलों के मध्य मुठभेड़ शुरू हुई जो तीन घंटे से अधिक समय तक चली। एंबुश में 700 से ज्यादा जवानों का एक दल फंस गया था।
मुठभेड़ की सूचना जिला मुख्यालय पर पहुंची, लेकिन नक्सलियों की एंबुश में फंसे जवानों से संपर्क न हो पाने के कारण मुख्यालय से बैकअप पार्टी कोे रवाना किया गया। बैकअप पार्टी 24 घायल जवानों और 2 जवानों के शव को ही रात में जिला मुख्यालय लाने में कामयाब रही। वहीं 7 जवानों को घटनास्थल से सीधे रायपुर रेफर किया गया। इस प्रकार कुल 31 जवानों को पुलिस ने रात में ही रेस्क्यू किया। सुबह एक बार फिर घटनास्थल के लिए जिला मुख्यालय से सुरक्षाबल रवाना हुए और 6 शवों को जिला मुख्यालय और 15 को संभाग मुख्यालय जगदलपुर लाया गया है। फिलहाल दो जवानों के पार्थिव शरीर को उनके गृह ग्राम के लिए रवाना कर दिया है।
सीआरपीएफ से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि नक्सली मुठभेड़ के बाद जवानों के दो दर्जन से ज्यादा हथियार भी लूटकर ले गये हैं। हालांकि पुलिस के अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है, लेकिन उनका कहना है कुछ हथियार ऑपरेशन में गए जवान अपने साथ लेकर आ गए थे।

अब भी बने हुए हैं सवाल

  • क्या नक्सलियों के शाजिस का हिस्सा बन गया सुरक्षा बल ?
  • इनपुट में चूक या जल्दबाजी में हुई गड़बड़ी ?
  • सुरक्षा बल के बेसकैम्प बनाए जाने के विरोध में हुआ हमला या शाजिस कुछ और?
  • क्या दुर्दांत नक्सल हिड़मा ने बनाई थी पूरी योजना?

क्या थी सुरक्षा बल की रणनीति, जिससे काल के गाल में समा गए 22 जवान

सूत्रों की माने तो सुरक्षा बलों के जवानों को लगातार इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में नक्सलियों के जमा होने के इनपुट मिल रहे थे, इसी इनपुट के आधार पर CRPF की कोरबा, DRG, STF, बस्तरिया बटालियन के तकरीबन 2000 जवान अलग-अलग टुकड़ियों में सर्च ऑपरेशन पर निकले थे, यह एरिया गुरिल्ला वार क्षेत्र अंतर्गत आता है जोकि नक्सलियों का गढ़ माना जाता है जहां दुर्दांत नक्सली लीडर हिड़मा की पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के सदस्य स्थायी रूप से एक्टिव रहते हैं। सूत्र बताते हैं कि हिड़मा की मौजूदगी के इनपुट में ही फोर्स जंगल में घुसी थी। जिससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह इनपुट नक्सलियों ने ही तो नहीं दिया था और सुरक्षा बल के जवान इनका शिकार हो गए। हिड़मा वही नक्सल लीडर है जिसे झीरम हमले का मास्टरमाइंड था, हिड़मा ने अब तक दर्जनों बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है।

सीएम कल करेंगे बस्तर का दौरा
इधर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने असम दौरे से रायपुर लौट गए हैं। वे रायपुर में भर्ती 13 जवानों से मुलाकात करने के लिए अस्पताल जाएंगे। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह, छत्तीसगढ़ पुलिस के डीजीपी डीएम अवस्थी ने घायल जवानों से मुलाकात की है। सीएम भूपेश रविवार रात को ही नक्सल ऑपरेशन से जुड़े तमाम अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद सोमवार को बस्तर दौरे पर रहेंगे।
10 दिनों के भीतर दूसरी बड़ी वारदात
नारायणपुर में 23 मार्च को डीआरजी के जवान नक्सल विरोधी अभियान को अंजाम देकर बस में सवार होकर लौट रहे थे। इस दौरान कन्हारगांव-कड़ेनार रोड के बीच बस को बम से उड़ा दिया गया था। इस हमले में एक वाहन चालक आरक्षक और चार जवान मौके पर शहीद हो गए थे। इसके अलावा 12 अन्य जवानों को गंभीर चोटें आईं थीं। यह घटना इतनी भयावह थी कि बस उड़ कर पुल के नीचे आ गई थी। जिस जगह पर ब्लास्ट हुआ था, वहां गहरा गड्ढा हो गया था।

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Badal Singh Thakur

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