छत्तीसगढ़ के बिगड़े हालात के लिए नेता और नीति जिम्मेदार : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

 छत्तीसगढ़ के बिगड़े हालात के लिए नेता और नीति जिम्मेदार : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

तोपचंद, रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन  राज्य के जिम्मेदार नेताओं और कोरोना से बचाव के लिए राज्य की नीति को जिम्मेदार ठहराया है। केंद्रीय मंत्री ने एक पत्र जारी कर बताया कि छत्तीसगढ़ ने कोवैक्सीन के इस्तेमाल से मना कर दिया है। जबकि भारत के ड्रग कंट्रोलर ने इसके आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे रखी है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के नेता जिस तरह से बयान दे रहे हैं, उससे लोगों में टीका लगवाने की प्रति हिचक बढ़ी है। बता दें कि राज्य में वैक्सीन की कमी की बात तमाम जिलों से आ रही है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जो राज्य सभी को टीका लगवाने की बात कर रहे हैं, जबकि वे अपने राज्य में वैक्सीनेशन का तय लक्ष्य भी पूरा नहीं कर पाए हैं। महाराष्ट्र ने पहली डोज के तहत केवल 86% स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का टीकाकरण किया है। दिल्ली और पंजाब में यह संख्या क्रमश: 72% और 64% है। दूसरी तरफ 10 भारतीय राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने 90% से अधिक का टीकाकरण किया है। यानी टीकाकरण के तय लक्ष्य को पूरा न करने वाले राज्य भी केंद्र पर आरोप लगा रहे हैं।

केंद्र सरकार ने नियमित रूप से महाराष्ट्र की राज्य सरकार की काउंसलिंग की। उन्हें सभी संसाधन उपलब्ध कराए और केंद्रीय टीमों को मदद के लिए भी भेजा। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा बरती गई ढिलाई अब साफ दिखाई दे रही है और अब वह सभी को डरा रही। आज, महाराष्ट्र में न केवल देश में सबसे अधिक मामले और मौतें हो रही हैं, बल्कि दुनिया में सबसे अधिक पॉजिटिव दर भी है। उनका परीक्षण भी मानकों के आधार पर नहीं है और कान्टैक्ट ट्रेसिंग भी कई सारे सवाल खड़े कर रही है।

इसी तरह छत्तीसगढ़ के नेताओं के बयान टीकाकरण पर गलत सूचना और डर फेैला रहे हंै। उन्होंने राज्य के नेताओं से अनुरोध्ा किया है कि वे अपने राजनीतिक ढांचे पर जोर देने की जगह स्वास्थ्य ढांचे पर जोर दे तो ज्यादा बेहतर होगा। छत्तीसगढ़ में पिछले 2-3 हफ्तों में असमय मौतों की संख्या बढ़ी है। वह अभी भी रैपिड एंटीजन टेस्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। जो एक समझदारी वाली रणनीति नहीं है। राज्य सरकार ने वास्तव में कोवैक्सिन का उपयोग करने से इनकार कर दिया। बावजूद इसके कि भारत के ड्रग कंट्रोलर द्वारा आपातकालीन इस्तेमाल (ईयूए) की मंजूरी दे रखी है। इतना ही नहीं, अपने कार्यों से राज्य सरकार के नेताओं ने टीके के प्रति हिचक को भी बढावा दिया। शायद ऐसा करने वाली वह दुनिया में एकमात्र सरकार होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई अन्य राज्यों को भी अपने स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों पर ध्यान देने की जरूरत है। उदाहरण के लिए, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात में परीक्षण की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता है। पंजाब में जरूरतमंदों को अस्पताल में भर्ती होने वालों की शीघ्र पहचान करके उच्च मृत्यु दर में सुधार करने की जरूरत है। मास्क पहनना और सामाजिक दूरी का पालन कराने में राज्यों में सुस्त है। हमें यह सब तेजी से और बड़े पैमाने पर करने की जरूरत है।

मेरी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं अब बोलने के लिए विवश हूं क्योंकि मेरी चुप्पी को कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए। राजनीति करना आसान है, लेकिन शासन और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार ही असली परीक्षा है। मैं फिर से सभी राज्यों से कहना चाहूंगा कि केंद्र सरकार उनकी मदद के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। भारत के पास प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और कड़ी मेहनत करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के होने का अनूठा फायदा है। हम सभी को इस महामारी को हराने के लिए कड़ी मेहनत और एक साथ काम करने की आवश्यकता है।

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