निगम बजट पर रिएक्शन : नेता प्रतिपक्ष मिनल चौबे ने कहा– महापौर ने निगम की आय बढ़ाने के क्या प्रयास किया

 निगम बजट पर रिएक्शन : नेता प्रतिपक्ष मिनल चौबे ने कहा– महापौर ने निगम की आय बढ़ाने के क्या प्रयास किया

तोपचंद, रायपुर। नगर निगम रायपुर के महापौर एजाज ढेबर ने मंगलवार को अपने कार्यकाल का दूसरा बजट सार्वजानिक किया। मेयर एजाज ढेबर ने इस बार 67 लाख के घाटे के साथ 1476 करोड़ 73 लाख 92 हजार रुपए का बजट पेश किया गया। महापौर एजाज ढेबर ने बजट के बारे में बताया था कि बजट के लिए प्रस्ताव पारित करके अनुमोदन के लिए भेजा गया है। कोरोना की वजह से 27 मार्च की सामान्य सभा स्थगित की गई थी।  इसमें रायपुर नगर निगम का बजट पेश किया जाना था। अनुमोदन के लिए भेजे गए प्रस्ताव के संबंध में महापौर एजाज ढेबर ने बजट में शामिल योजनाओं के संबंध में जानकारी देते हुए कहा था कि गोलबाजार में दुकानदारों को मालिकाना हक दिलाया जायेगा।  शनिवार और रविवार को महिलाओं के लिए आनंद मेला की तर्ज पर व्यवसाय दिया जाएगा। टैंकर फ्री शहर का काम करेंगे। इसके अलावा मिशन क्लीन खारुन के साथ तुंहर सरकार तुंहर द्वार योजना की सफलता को देखते हुए इसे आगामी बजट में और लाया जाएगा। डॉक्यूमेंट बनवाने फास्ट्रेक व्यवस्था की जाएगी।

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इस पर नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे ने कहा बजट की एक परंपरा होती है, जिसके हिसाब से यह बताया जाना चाहिए कि निगम को कहाँ से कितनी आय हुई और नगर निगम की आय बढाने के लिए क्या प्रयास किए गए। लेकिन महापौर ने इसका कोई जिक्र नहीं किया है। जवाहर नगर की दुकानें बेचीं गई हैं, लेकिन उससे मिली धनराशि के बारे में नहीं बताया गया।

उन्होंने ने कहा कि महापौर ने घाटे का बजट पेश किया।ऐसे में हम जानना चाहते हैं कि महापौर ने नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए क्या किया है। नगर निगम के मूलभूत कार्य, जैसे बिजली, पानी और सफाई का कोई समावेश इस बजट में नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि कोरोना काल में जो छोटे, फुटकर व्यापारी पीड़ित हुए हैं, उनके लिए इस बजट में क्या रखा गया है। यह हवा हवाई बजट है। उनके अनुसार इस बजट में पुराने कार्यों की पुनरावृति की गई है।

स्मार्ट सीटी के तहत होने वाले कार्यों में अपनी फोटो लगा कर अपनी पीठ खुद थापथापा रहे हैं।  जनता पीने के पानी के लिए तरस रही है।  बजबजाती नालियां और बिजली की अव्यवस्था से त्रस्त है। पेयजल की समस्या को लेकर सभी 70 वार्ड के पार्षद लगातार उनका ध्यान केंद्रित करा रहे हैं, लेकिन वे आंख मूंदे बैठे हैं।

दूसरी बात स्मार्ट सीटी की संस्था में जो एक व्यक्ति रहता है उसको दोहरा प्रभार दिया जाता है। हमारे नगर निगम के बहुत से इंजीनियर स्मार्ट सीटी के तहत काम करते हैं।  बावजूद इसके महापौर कोई भी काम चहेते इंजीनियर से कराते हैं।

नगर निगम के जो कमिश्नर होते है वही स्मार्ट सीटी के एमडी भी हैं।  स्मार्ट सीटी का सारा काम वही कर रहे हैं। सिर्फ जनता उन तक अपनी समस्या न लेकर जाए इसलिए नगर निगम और स्मार्ट सीटी को अलग रखते है। उनके पास खुद का कोई बजट नहीं है।

उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य की सरकार नगर निगम से स्मार्ट सीटी का पैसा ले रही है। ऐसे कार्य जो स्मार्ट सीटी के तहत नहीं हो सकते, उन कार्यों को भी स्वार्थवश स्मार्ट सीटी के तहत कराया जाता है।  

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Shrikant Baghmare

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