रिहाई पर राजनीति  : सीएम बोले- अफसरों और समाजसेवियों के सहयोग से रिहा कराया जवान, पूर्व सीएम और बृजमोहन ने कहा- सरकार योजना बनाती रही और जवान छूटकर आ भी गया

 रिहाई पर राजनीति  : सीएम बोले- अफसरों और समाजसेवियों के सहयोग से रिहा कराया जवान, पूर्व सीएम और बृजमोहन ने कहा- सरकार योजना बनाती रही और जवान छूटकर आ भी गया

तोपचंद, रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में जवानों पर हमले के दौरान अगवा सीआरपीएफ के जवान राकेश्वर सिंह मनहास को पांच दिन बाद सकुशल छुड़ा लिया गया है। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भूपेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार छह दिन तक योजना ही बनाती रही और जवान छूटकर भी आ गया। हालांकि कुछ लोग जवान की रिहाई में सरकार की साइलेंट वर्किंग को बड़ी वजह बता रहे हैं।

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डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि सरकार तो छह दिनों तक रणनीति ही बनाती रह गई। यह तो अच्छा हुआ कि जवान सकुशल रिहा हो गया। पूरे देश को खुशी है कि जवान सकुशल रिहा हो गया। पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि जवान की रिहाई में सरकार की भूमिका शून्य है। अगर सरकार की भूमिका होती तो जवान दूसरे दिन ही रिहा हो जाता, हमें बहुत खुशी है कि सभी की अपील पर जवान की सकुशल रिहाई हो गई।

भूपेश सरकार की साइलेंट वर्किंग

बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी। बैठक में नक्सलियों के कहे अनुसार मध्यस्थों का नाम फाइनल किया गया। इसके बाद मध्यस्थों को बीजापुर के लिए रवाना किया गया। सुबह पत्रकारों के साथ मध्यस्थों की टीम एक अज्ञात जगह पर गई। जहां नक्सलियों ने भारी संख्या में ग्रामीणों के सामने जन अदालत लगाई। इसके बाद मध्यस्थों और नक्सलियों के बीच वार्ता हुई और जवान को सकुशल छोड़ा गया।

किसे बनाया गया था मध्यस्थ, किसका रहा योगदान

अपहृत आरक्षक राकेश्वर सिंह मनहास के रिहाई के लिए पद्मश्री धर्मपाल सैनी, माता रुक्मणि आश्रम जगदलपुर, तेलम बोरैया, वरिष्ठ पदाधिकारी आदिवासी समाज जिला बीजापुर द्वारा प्रयास किए गए। रिहाई में जिला बीजापुर के पत्रकार गणेश मिश्रा और मुकेश चंद्राकर का योगदान सराहनीय रहा।

सीएम ने केंद्र और राज्य के पुलिस अफसरों को दिया श्रेय

सीएम भूपेश बघेल के बयान के अनुसार केंद्र सरकार और राज्य सरकार के स्थानीय पुलिस अधिकारियों के प्रयासों से अपहृत जवान को रिहा कराने में सफलता मिली हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जवान के सकुशल रिहा होने पर प्रसन्नाता जाहिर की हैं। मुख्यमंत्री ने जवान की रिहाई के अभियान में सहयोगी बने धर्मपाल सैनी, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों और स्थानीय पत्रकारों का आभार व्यक्त किया हैं ।

3 अप्रैल को हुआ था अपहरण

शनिवार 03 अप्रैल को सीआरपीएफ और डीआरजी की तर्रेम थाना क्षेत्र में मुठभेड़ हुई थी। नक्सलियों ने तीन जगह एंबुश लगाकर जवानों को घेर लिया था। भुठभेड़ में 22 जवान शहीद हो गए थे और 31 घायल हुए थे। मुठभेड़ में बड़ी संख्या में नक्सलियों के मारे जाने की भी सूचना मिली थी, लेकिन नक्सलियों ने 4 साथियों के मारे जाने की पुष्टि की। सरकार और पुलिस की ओर से बताया गया कि नक्सली अपने मृत साथियों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर ले गए हैं। मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों ने सीआरपीएफ के जवान राकेश्वर सिंह मनहास को अगवा कर लिया था। नक्सलियों ने उसे छोड़ने के लिए सरकार के प्रतिनिधमंडल से बात करने की बात कही थी। इसी बीच जेल बंदी रिहाई समिति (यह समिति जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई के लिए काम करती है।) की ओर से सोनी सोरी सहित 20 लोग बुधवार को जंगल में गए थे। लेकिन उनका नक्सली नेताओं से संपर्क नहीं हो सका।

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Shrikant Baghmare

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