कोरोना संकट में मदद को आगे आए तो सहयोगी भी मिल गए, किसी ने दी गाड़ी तो कोई कर रहा श्रमदान, अब एम्बुलेंस खरीदने की तैयारी

 कोरोना संकट में मदद को आगे आए तो सहयोगी भी मिल गए, किसी ने दी गाड़ी तो कोई कर रहा श्रमदान, अब एम्बुलेंस खरीदने की तैयारी
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तोपचंद, रायपुर। कोरोना महामारी ने एक बार फिर दिखाया है कि मानवता का वजूद कायम है| सैकड़ों लोग नि:स्वार्थ भाव से जन सेवा में लगे हैं। जिससे जो बन पड़ रहा है, वह कर रहा है। छत्तीसगढ़ की राजधानी में भी युवाओं की टोली सड़कों पर है और इनमें से एक है सुमित फाउंडेशन ! यह फाउंडडेशन लोगों की मदद में इस कदर जुटा है कि संस्था अब एक एम्बुलेंस खरीदने के लिए पैसे जुटाने में लगी है।

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फाउंडेशन को चलाने वाले रविंद्र सिंह क्षत्रिय है, उनका कहना है कि वे और उनकी टीम कोरोना जैसी महामारी के बीच लोगों को बचाने के लिए काम कर रही है और इसमें वे सफल भी हुए हैं| उन्होंने अब तक 50 लोगों की मदद की है, जिससे उनकी जान बच सकी| वे कहते हैं मदद करने के लिए पैसे की नहीं, नीयत अच्छी होनी चाहिए।

सुमित फाउंडेशन की शुरुआत अपनों को खोने के दर्द से शुरू हुई थी। इसके संचालक रविंद्र सिंह क्षत्रिय के भाई सुमित सिंह क्षत्रिय की 2015 में किडनी फेलियर के कारण मृत्यु हो गई थी। इसके बाद ही सुमित फाउंडेशन की शुरुआत हुई। सुमित फाउंडेशन छत्तीसगढ़ का नॉन प्रॉफिट NGO है, जो बिना किसी स्थिर आर्थिक मदद के गरीबों और जरूरतमंदों की गंभीर स्वास्थ्य संबंधी सहायता करता है।

फाउंडेशन से देश-विदेश में दो लाख से ज्यादा लोग जुड़ चुके है। अब तक 9 राज्यों के मरीजों को फाउंडेशन द्वारा मदद मिल चुकी है। रविंद्र कहते हैं कि उनका फाउंडेशन कोरोना मरीजों अस्पताल ले जाने से डिस्चार्ज होने तक सहायता करता है। जरुरतमंदों की एक कॉल पर उन्हें मदद पहुँचाने निकाल जाते है।

दिलचस्प बात यह है कि रविन्द्र और मित्र अरविंद सोनवानी वास्तव में किसी एम्बुलेंस का इस्तेमाल नहीं करते हैं, बल्कि एक हुंडाई क्रेटा कार का इस्तेमाल करते है, जो ऑक्सीजन से लेकर अन्य इमरजेंसी सुविधाओं से लैस है। रविन्द्र की टीम/कोर मेम्बर्स में श्रृष्टि त्रिवेदी, चंद्रशेखर, शिवाली श्रीवास्तव, अभिलाष, अरविंद सोनवानी और अन्य डॉक्टर्स शामिल हैं।

क्रेटा को एम्बुलेंस में बदलने की कहानी

दरअसल, महामारी के शिकार लोगों की हालत देखने के बाद रविन्द्र ने घर से बाहर निकाल कर लोगों कि मदद करने का फैसला किया। उन्होंने ने देखा कि काफी लोगों की मृत्यु समय पर अस्पताल ना पहुंचने पाने के कारण हो रही हो है। ऐसे में उन्होंने वाहन की आवश्यकता बताते हुए सोशल मीडिया में एक पोस्ट किया। उन्हें प्रमोद साहू (इंटरनेशनल रंगोली आर्टिस्ट) ने अपनी गाड़ी इस कार्य के लिए दे दी ।

गाड़ी मिलने के बाद समस्या थी की ऐसी परिस्थिति में गाड़ी को चलाएगा कौन?

ऐसे में रविन्द्र के दोस्त अरविंद सोनवानी (वीडियो जर्नलिस्ट) ने उनका साथ दिय। तबसे रविन्द्र और अरविन्द सोनवानी दोनों कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का काम कर रहे हैं| अरविन्द सोनवानी बताते है कि हाल ही में उसके दोस्त की माँ का एम्बुलेंस न मिलने के वजह से निधन हो गया। इस वजह से अरविन्द रविन्द्र के साथ इस सामाजिक कार्य में जुड़कर लोगों की सहायता कर रहे है। वे अस्पताल पहुंचाने के साथ-साथ मरीजों के पंजीयन से लेकर उनके पेमेंट तक हर कार्य में सहायता करते है।

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Shrikant Baghmare

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