व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फेर में कोरोना वैक्सीन, सच्चाई जान इंटरनेट की दुनिया से विश्वास उठ जाएगा

 व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फेर में कोरोना वैक्सीन, सच्चाई जान इंटरनेट की दुनिया से विश्वास उठ जाएगा
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नॉलेज डेस्क, तोपचंद। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में कई तरह के दावे किये जाते हैं। लेकिन इन दावों की हकीकत कुछ और ही होती है। महामारी के दौर में भी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का अफवाह फ़ैलाने में कम योगदान नहीं रहा है। इन दिनों इसकी फेर में कोरोना वैक्सीन भी आ गया है। इसे पढ़कर लोग वैक्सीन के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। एक ऐसे ही व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का फेक पाम्पलेट तोपचंद के हाथ लगा है, जिसे लेकर तोपचंद ने कोविड का इलाज कर रहे डॉक्टर से बात की है। उन्होंने इसका पूरी तरह से खंडन करते हुए इसे फर्जी करार दिया है।

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व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में डॉक्टरों के नाम से वायरल की जा रही वैक्सीन लगवाने का पहला तथ्य ही गलत है। वायरल पाम्पलेट में कहा गया है कि अविवाहितों को वैक्सीन को डोज लेने कहा गया है, ऐसे करने से विवाह के बाद संतानहीनता का दावा किया गया है। इसे लेकर आरएलसी मेमोरियल हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. मंजीत चंद्रसेन कहते है “ये पूरी तरह झूट है, वैक्सीन लगवाने के बाद इस तरह का केस नहीं देखा गया है। यह अफवाह है कोरोना वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिकों ने पूरी शोध के बाद ही इसे लोगों के लिए उपलब्ध कराया है।

फेक पाम्पलेट

वायरल पाम्पलेट में कहा गया है कि बच्चों को वैक्सीन से दूर रखे, भविष्य में कई बीमारियां होने की संभवना है। इसे लेकर डॉ. मंजीत कहते हैं कि बच्चों को तो वैक्सीन की डोज लगाई ही नहीं जा रही है। यहां तक अभी तक बच्चों में इसका शोध भी नहीं किया गया है। यह दावा किस आधार पर किया जा रहा है। समझ से परे हैं। डॉक्टर मंजीत को तोपचंद ने पूरी पाम्पलेट मुहैया करवाई थी, उन्होंने ने कहा इस पर कहा है कि यह पूरी तरह से फर्जी है और अफवाह फैलाने के उद्देश्य से इसे प्रचारित किया जा रहा है। वैक्सीन की कोई साइड इफेक्ट भविष्य में देखने नहीं मिला है। गंभीर बिमारियों से जूझ रहे लोगों को इसे अवश्य लेना चाहिए।

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Shrikant Baghmare

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