छत्तीसगढ़ के गाँवों में चला रहे हैं ‘इज्जत’ अभियान , अब तक 12 लाख सैनेटरी पैड बाँट चुके हैं ‘अंचल’

 छत्तीसगढ़ के गाँवों में चला रहे हैं ‘इज्जत’ अभियान , अब तक 12 लाख सैनेटरी पैड बाँट चुके हैं ‘अंचल’

Raipur\Nisha Sharma : कुछ सालों पहले अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म आई थी “पैडमैन”.. जिसमें महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर समाज के नजरिये और एक युवक द्वारा उस नजरिये को बदलने के संघर्ष की कहानी को बताया गया था।

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ऐसे ही एक शख्स है अंचल ओझा जो पिछले कई सालों से सरगुजा समेत छत्तीसगढ़ के अलग अलग क्षेत्रों में जाकर महिलाओं और युवतियों को महावारी के दिनों में सैनटरी पैड के उपयोग करने के फायदों के बारें में न केवल जागरूक करते है बल्कि उन्हें नि:शुल्क पैड भी उपलब्ध करवाते है। इन्होनें इस कार्य के लिए संस्था का भी निर्माण किया जिसका नाम सरगुजा साइंस ग्रुप है। संस्था द्वारा अब तक 20 लाख से अधिक कीमत के 12 लाख सेनेटरी पैड ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचाया गया है। अपने इस अभियान को अंचल ने इज्जत  नाम दिया हुआ है।

संस्था के अध्यक्ष अंचल ओझा बताते है कि 2013 में जब वो दिल्ली गए थे तो वहां गूंज नामक संस्था जो महिलाओं के लिए काम करती है उनके कामों को देख कर अंचल ने इस बारे में विचार किया कि माहवारी केवल बड़े शहरों की बस नहीं बल्कि पूरे विश्व की महिलाओं की समस्या है। जिसके बाद उन्होंने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर 1 जनवरी 2014 को माहवारी पर चर्चा नाम से योजना चला कर इस काम को करने की शुरूवात की थी। तो लोगों ने उनका सपोर्ट नहीं किया था। लोगों का खासकर के पुरुषों का कहना था कि महावारी जैसे बातों को सार्वजनिक स्थानों पर नहीं लाना चाहिए। लेकिन धीरे – धीरे आंचल के लगातार प्रयास से स्कूल और कॉलेजों की महिलाएं और युवतियों खुलकर सामने आने लगी और उन्होंने आंचल से कहा कि पहली बार उन्होंने खुल के महावारी की समस्या के बारे में किसी से बात की इसमें होनी वाली परेशानियों और मदद के बारे में बात की। जिसके बाद इन युवतियों ने सैनेटरी पैड के प्रति युवतियों को जागरूक करने लगी। आज इसी काम के वजह से लगभग 100 वालेंटियर सरकारी स्कूल की शिक्षिका है। जो हर महीने सेनेटरी पैड का वितरण करने के साथ कार्यक्रमों का भी आयोजन करते है।

आज की तारीख में सरगुजा जिले के लगभग 450 गावों में 3000 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा चुका है। इसके साथ ही आज 7 से अधिक स्वयं सहायता समूह इस योजना में इनके साथ जुड़े हुए है।

इसके साथ ही अंचल ओझा की संस्था ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को लेकर भी जागरूक करने के साथ साथ 2 स्कूलों का संचालन करते है। जहां कम फीस में छात्रों को पढ़ाया जाता है। ग्रामीण अंचल में बच्चो को स्कूल में शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी ये लगातार प्रोग्राम का आयोजन करते रहते हैं।

2010 में इसकी शुरुवात सरगुजा संभाग के सबसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र चुंचुना गांव से की थी। अंचल बताते है कि इस गांव तक पहुंचने के लिए सड़क निर्माण भी नहीं हो पाया है इसकी वजह नक्सलियों का आतंक है, लेकिन अंचल यहां तक का सफर पैदल तय कर पहुंचे। यहां के स्कूल के जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई सामग्री के साथ जूते मोजे बैग, और खेल सामग्री का वितरण किया था। जिससे बच्चे पढ़ाई को लेकर जागरूक हो सके।

 

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Nisha Sharma

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